Lutna – Irshad Kamil

लोग है खाते क़सम वफ़ा की,
मैंं ज़हर हिज़र दा खाया
लोग ग़वादें दिल इश्क़ में,
मैंनें अपना आप गँवाया 
फिर भी मेरा कुछ ना हाये मेरे सोने यार को भाया ।