False World. -pleiades.

निकलूँ जब घर से
तो हँसी ओढ़ लेता हूँ,
दिल में हो कुछ भी
बाहर सब सह लेता हूूँ

चेहरे पे हँसी,
दिल में दर्द लिए
लोगों का चैन और सूकून देखता हू्ँ,
और वही हक़ीक़त समझ लेता हूँ

भूल जाता हूँ,
कोई याद भी तो दिलाए मुझे,
सबने ओढ़े हैं चेहरे यहाँ, सब के ख़ातिर
बहकाने की अदाकारी में सब हो गऐ हैं शातिर

मैंने भी कुछ चेहरे बनाए
जगह-जगह के हिसाब से पहना उन्हें
और अलग कहानी क़िस्से सुनाए

समय के साथ मैं ये सब सीख तो आया,
मगर दिल को ये सब रास न आया
याद आता है अब
तुम्हारे साथ था जो सब

न मेरी कोई हँसी झूठी थी
न तुम कभी बिना बात रूठीं थीं

अपनी बातों से मैं तुम्हारा दिमाग़ भर देता,
न ख़ुद सोता, न तुमको सोने देता

मेरी फ़िज़ूल बातें,
तुम्हारे प्यारे थप्पड़,
दिन, महीने गुज़रते
हम लड़ते, गाते हँसकर

मैं, मैं था
तुम, तुम हीं थीं
सब सच्चा था
झूठीं तो सिर्फ़ ये दुनिया थी

-pleiades.

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